Reel Creators: 1.30 लाख रील क्रिएटर्स में से सिर्फ ढाई हजार ही कमा पा रहे हैं। बहुत सारे क्रिएटर्स को महिने में केवल कुछ हजार रुपए ही मिल रहे हैं। हर सोलहवां व्यक्ति कंटेंट क्रिएटर बनने का सपना देख रहा है, लेकिन रील बनाने में भी लोगों को बहोत स्ट्रगल करना पढ़ रहा है। बढ़ती कंपटीशन के कारण अब केवल फेम और पैसे कमाना ही प्रायोरिटी नहीं, अच्छा कंटेंट बनाना भी जरूरी है।

Reel Creators की ज़िन्दगी हो रही है बर्बाद, जा रहें हैं डिप्रेशन में

Reel Creators: 1.30 लाख रील क्रिएटर्स में से सिर्फ ढाई हजार ही कमा पा रहे हैं। बहुत सारे क्रिएटर्स को महिने में केवल कुछ हजार रुपए ही मिल रहे हैं। हर सोलहवां व्यक्ति कंटेंट क्रिएटर बनने का सपना देख रहा है, लेकिन रील बनाने में भी लोगों को बहोत स्ट्रगल करना पढ़ रहा है। बढ़ती कंपटीशन के कारण अब केवल फेम और पैसे कमाना ही प्रायोरिटी नहीं, अच्छा कंटेंट बनाना भी जरूरी है।

मेगा इंफ्लुएंसर्स को मिल रही है ज्यादा रकम:

ज्यादातर क्रिएटर्स की इनकम अधिकतर मेगा इंफ्लुएंसर्स को ही मिल रही है, जिनके फॉलोअर्स की संख्या 10 लाख से अधिक है। इन्हें लाखों करोड़ों की कमाई हो रही है, लेकिन सामान्य क्रिएटर्स को यह लाभ नहीं मिल पा रहा है।

भूल रहें हैं अपनी वास्तविकता:

रील्स बनाने वाले लोग सोशल मीडिया पर अपनी पहचान बनाने के लिए खुद को प्रमोट करते हैं, लेकिन इसमें लोग धीरे-धीरे डिप्रेशन की ओर बढ़ने लगे है। फेक फेम की लालसा में अपनी वास्तविकता भूल जाने का खतरा मॅडराने लगा है।

रील से होता है मानसिक रोग:

सेल्फाइटिस नामक मानसिक रोग में लोग खुद को फेमस बनाने के लिए बहुत सारी रील्स बनाते हैं। उन्हें अपने लाइक्स और कमेंट्स के लिए ज्यादा चिंता होती है। जब उन्हें इन्हें नहीं मिलते, तो वे उदास हो जाते हैं और धीरे-धीरे डिप्रेशन में चले जाते हैं।

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