भारत में मेडिकल टेक्नोलॉजी और भी मॉडर्न होती जा रही है, इस बात का सही एग्जांपल है वर्चुअल ऑटोप्सी जो अस्पतालों में शवों के पोस्टमार्टम के तरीके को पूरी तरह से बदल रही है।

अब नोएडा के अस्पताल में होगा बिना चीर फाड़ के पोस्टमार्टम, परिजनों को होगी सुविधा

भारत में मेडिकल टेक्नोलॉजी और भी मॉडर्न होती जा रही है, इस बात का सही एग्जांपल है वर्चुअल ऑटोप्सी जो अस्पतालों में शवों के पोस्टमार्टम के तरीके को पूरी तरह से बदल रही है। इस नई प्रक्रिया में, शव का चीर फाड़ने के बजाय एमआरआई, सीटी स्कैन, और डिजिटल एक्स-रे मशीनों का उपयोग किया जाता है, जिससे पोस्टमार्टम प्रोसेस न केवल तेज़ होता है, बल्कि शव को भी ज्यादा प्रोटेक्टिव रखा जाता है।

नोएडा में होगी वर्चुअल ऑटोप्सी की शुरुआत

इस उत्तर प्रदेश के एक अस्पताल में भी इसी नई प्रक्रिया को लागू करने की तैयारी हो रही है। नोएडा के एक अस्पताल में यह नई प्रक्रिया शुरू करने के लिए काम हो रहा है। यहां, शव के चीर फाड़ने की जरूरत नहीं होगी, जिससे परिजनों को भी राहत मिलेगी। इसके साथ ही मौत के मामलों में भी यह नई तकनीक काम आ सकती है, जैसे सड़क हादसों, हत्या, या संदिग्ध मौत के मामलों में।

पोस्टमार्टम की रिपोर्ट तेजी से मिलेगी

अस्पताल में प्रशिक्षित डॉक्टरों की मदद से वर्चुअल ऑटोप्सी की प्रक्रिया को शुरू किया जाएगा। यह नई प्रक्रिया मरीजों के परिजनों को सुविधा और सहूलता प्रदान करेगी, साथ ही पोस्टमार्टम की रिपोर्ट भी तेज़ी से उपलब्ध होगी।
समय की होगी बचत

इस प्रक्रिया से समय की बचत होना निश्चित है। अब तक अस्पताल में प्रतिदिन पांच से 10 शवों का पोस्टमार्टम होता है, जो वर्चुअल ऑटोप्सी के शुरू होने के बाद और भी तेज़ हो सकता है। इससे न केवल प्रक्रिया में तेज़ी आएगी, बल्कि विभिन्न प्रकार की मौत के मामलों में भी जांच की गई जानकारी सही तरह से मिल जाएगी।

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