Dogs Banned in Delhi: हाल ही देश में 23 "क्रूर" कुत्तों की नस्लों पर बैन लगाया गया था

Dogs Banned in Delhi: 23 नस्ल के कुत्तों की बिक्री पर अब भी रोक, कोर्ट ने केंद्र से माँगा जवाब

Dogs Banned in Delhi: हाल ही देश में 23 “क्रूर” कुत्तों की नस्लों पर बैन लगाया गया था इन नस्लों को बैन लगाने वाली हालिया अधिसूचना को चुनौती देने वाली याचिका पर सोमवार को केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर उच्च न्यायालय ने जवाब मांगा है। ऐसे में न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद ने यह स्वीकार करने के बावजूद कि अन्य उच्च न्यायालयों ने ऐसी राहत दी है, अधिसूचना पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। इस मामले में याचिकाकर्ताओं में से एक dog trainer है और दूसरा विशेष श्रेणी के कुत्तों का एक डॉक्टर है।

याचिकाकर्ताओं का तर्क:

याचिका में इस मामले को लेकर लॉजिक दिया गया कि भारत में इस conclusion पर पहुंचने के लिए किसी भी तरह का कोई अध्ययन नहीं किया गया था कि कुत्तों की नस्लें क्रूर थीं और उन पर रोक लगाना जरूरी था। वहीं याचिकाकर्ताओं ने कहा, ऐसा कोई डेटा सामने नहीं आया जो यह दिखाता हो कि कुत्तों ने आतंक पैदा किया है, या फिर कुछ ऐसा किया हो जिसके वजह से उनपर बैन लगाने की ज़रूरत हो। इस वजह उनपर मनमाने ढंग से पूरी तरिके से प्रतिबंध लगाना भारत के संविधान का उल्लंघन है। ऐसे में बिना किसी काटने वाले कुत्तों के लिए यह फैसला गलत है। उन्होंने कहा कि केन कोरसो, रॉटवीलर, टेरियर ब्रीड वाले कुत्तों पर प्रतिबंध लगाना scientific justification का आभाव है।

कुछ उच्च न्यायालयों ने पहले ही 23 कुत्तों की नस्लों पर प्रतिबंध पर रोक लगा दी है। पशु प्रेमी इस प्रतिबंध का विरोध कर रहे हैं और इसे क्रूर और अनावश्यक बता रहे हैं। सरकार का कहना है कि यह प्रतिबंध लोगों को कुत्तों के हमलों से बचाने के लिए आवश्यक है। यह देखना बाकी है कि उच्च न्यायालय इस मामले में क्या फैसला सुनाता है।

वैज्ञानिक अध्ययन करवाएगी सरकार

कुछ लोगों का मानना ​​है कि कुछ कुत्तों की नस्लें स्वाभाविक रूप से आक्रामक होती हैं और इन पर प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए। अन्य लोगों का मानना ​​है कि कुत्ते का व्यवहार उसके पालन-पोषण और प्रशिक्षण पर निर्भर करता है, न कि उसकी नस्ल पर। कुछ पशु प्रेमी संगठनों ने इस प्रतिबंध के खिलाफ याचिका दायर की है। सरकार ने कहा है कि वह इस मुद्दे पर scientific study करवाएगी। यह एक जटिल मुद्दा है जिसके दोनों तरफ मजबूत तर्क हैं।
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