रमा

सच ही कहते है, बड़े काम करने के लिए जायदा ताकत के बजाय बुलंद हौसले और मेहनत की जरूरत होती है।ऐसी ही एक कहानी आज हम आपको बताने जा रहे है। आगरा के छोटे से गांव सराय सहारा में रहने वाली क्रिकेटर रमा कुशवाहा की जिन्होंने 11 साल की छोटी से उम्र में बल्ला पकड़ा है।और इनका सपने की शुरुवात भीं गांव के लड़कों के साथ गली में क्रिकेट खेलते देख क्रिकेटर महेंद्र सिंह धोनी की तरह इंडियन टीम में हिस्सा लेने की हुई।लेकिन , गली से इंडियन टीम में पहुंचने का रास्ता कितना मुश्किल होगा, ये खुद रमा को नहीं पता था। उनकी राह में पहला रोड़ा तो घर की आर्थिक स्थिति ही थी। मगर, रमा ने हर बाधा की बाउंसर को अपने जज्बे से हिट कर बाउंड्री के पार कर दिया। छोटे गांव से निकली रमा आज इंडियन-19 क्रिकेट टीम में पहुंच गई हैं।
आइए जानते हैं रमा की कहानी,

# बडे़ भैया ने सपोर्ट किया

अपको बता दे, रमा ने अपने घरवालों को बताया कि वो क्रिकेट खेलने चाहती हैं। पहले तो माता-पिता बोले कि पढ़ाई लिखाई पर ध्यान दो। लेकिन, उनके बडे़ भाई बंटू उनके साथ खडे़ हुए। बंटू ने रमा को घर के पास ही एक क्रिकेट एकेडमी में एडमिशन दिलवा दिया। अब रमा सुबह-शाम एकेडमी जाने लगीं। बेटी की खुशी और उसके जज्बे को देखकर माता-पिता भी सपोर्ट में आ गए।

लेकिन, क्रिकेट एकेडमी की फीस, किट और जूते व अन्य सामान के खर्चे ने रमा के आगे मुश्किल खड़ी कर दी। गांव वाले भी घरवालों को ताना देते थे कि लड़की को पढ़ाने के बजाए खेलने भेज रहे हैं। मगर, घरवालों ने इस पर ध्यान नहीं दिया।

# कोच के कारण चमका सितारा और बदली किस्मत

आपको बता दे, पैसे की दिक्कत के कारण रमा ने जब एकेडमी जाना बंद कर दिया तो उनके कोच कैलाश घर पहुंचे। कोच ने रमा के घरवालों से उसे एकेडमी भेजने को कहा तो उन्होंने फीस न होने की बात कही। रमा का टैलेंट देख कोच ने कहा कि फीस की चिंता न करें, बस रमा को एकेडमी भेजें। इसके बाद रमा ने फिर से एकेडमी जॉइन की। मगर, इसके एक साल बाद किसी कारणवश एकेडमी बंद हो गई । बस यहीं से रमा कि जिंदगी में टर्निंग पॉइंट आया।

और तो और कोच कैलाश ने रमा को जीडी गोयनंका चाहर एकेडमी में प्रैक्टिस की व्यवस्था करा दी। वहां के कोच संतोष के निर्देशन में रमा ने प्रैक्टिस शुरू कर दी। एकेडमी के संचालक व अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर दीपक चाहर व राहुल चाहर के कोच लोकेंद्र सिंह चाहर की नजर रमा पर पड़ी।

उन्होंने रमा के जोश और जज्बे को देखा। वो रमा के खेल पर नजर रखने लगे। एक दिन उन्होंने रमा के कोच संतोष से कहा कि इस लड़की को उन्हें दे दें। इसमें टीम इंडिया में पहुंचने का दम है।

और फिर आया वो समय आया जब, अगले दिन से रमा को लोकेंद्र सिंह चाहर ने ट्रेंड शुरू कर दिया। रमा के कोच लोकेंद्र चाहर का कहना है कि अंडर 19 टीम में चयन पर खुशी है। रमा में अलग लेवल का टैलेंट है। उसने इस मुकाम को हासिल करने के लिए बहुत मेहनत की है। विपरीत परिस्थिति के बाद भी उसके कदम नहीं रुके। उन्हें पूरी उम्मीद है कि अगले साल होने वाले महिला अंडर-19 विश्वकप में रमा टीम में होगी।

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