नई दिल्ली :- राजधानी में ऑटो ड्राइवरों मनमाने तरीके से किराया वसूल करते है. अधिकतर ऑटो ड्राइवर मीटर से नहीं चलते. मीटर से न चलने के लिए वे अलग अलग बहाने बनाते हैं. मीटर खराब होना, सीएनजी के दाम और महंगाई का हवाला देकर अधिक किराया चार्ज करते हैं. जिससे कि यात्रियों को ऑटो में सफर करने के लिए मुंह मांगा किराया देना पड़ता है.

तरह-तरह के बहाने

बता दें की दिल्ली में ऑटो चालकों द्वारा मीटर से चलने में न नुकुर करने की शिकायतें काफ़ी आम हैं. कोविड के बाद से इसमें और भी बढ़ोतरी देखी गई है. सवारों को इनकार करना और मनमाना किराया वसूलना तो है ही, रूट पर जाने को लेकर भी उनकी ना-नकुर बढ़ती ही जा रही है. इसके लिए वह तरह-तरह के बहाने बनाते हैं.

किराए में बदलाव करने के लिए कमेटी का गठन

जानकारी के मुताबिक, दिल्ली सरकार ने किराए में बदलाव करने पर विचार करने के लिए एक कमेटी का गठन किया था, लेकिन उस पर भी अभी कोई फैसला नहीं हुआ है. ऑटो टैक्सी यूनियनों के पदाधिकारियों का अनुमान है कि अगर किराया बढ़ाया गया, तो ऑटो चालकों को मिलने वाली सवारियां और कम हो जाएंगी, क्योंकि ओला-उबर जैसी ऐप आधारित कैब सर्विस और बाइक टैक्सी सर्विस की वजह से पहले ही उनके काम पर प्रभाव पड़ रहा है. यही कारण है कि यूनियन वाले ऑटो के किराए में बढ़ोतरी नहीं चाहते, बल्कि वे चाहते हैं कि दिल्ली के ऑटो ड्राइवरों को सीएनजी पर सब्सिडी दी जाए और उन्हें 35 रुपये प्रति किलो के रेट पर सीएनजी उपलब्ध कराई जाए. इससे उन्हें भी राहत मिल जाएगी और यात्रियों की जेब पर भी कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा.

ऑटो वालों की शिकायत जायज

बता दें की इस साल जब से सीएनजी के दामों में अप्रत्याशित बढ़ोतरी हुई है, तब से तो ऑटोवालों ने मीटर से जाना बंद ही कर दिया है. अगर वो मीटर से चलने के लिए राजी होते भी हैं, तो इस शर्त पर कि जो किराया बनेगा, उसके साथ 10-20 रुपये अधिक देने पड़ेंगे. पूछने पर सीएनजी के दामों में बढ़ोतरी का हवाला दें दिया जाता है. वैसे, एक लिहाज से उनकी यह शिकायत जायज भी है.

ऑटो वालों को सब्सिडी उपलब्ध क्यों नहीं?

वहीं पदाधिकारियों का कहना है कि जब दिल्ली सरकार बिजली, पानी, इलेक्ट्रिक गाड़ियों की खरीद, महिलाओं के लिए बसों में मुफ्त यात्रा समेत कई अन्य मामलों में सब्सिडी दे सकती है, तो फिर ऑटो ड्राइवरों को भी कम दाम पर सीएनजी उपलब्ध करा सकती है. दिल्ली सरकार इन मांगों पर नए सिरे से विचार तो कर रही है, लेकिन अभी तक कोई निर्णय नहीं हो सका है. इसी वजह से ऑटो ड्राइवरों के मीटर से न चलने और ओवरचार्जिंग करने के मामले काफी बढ़ गए हैं.

By Kajal

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