Diwali Bonus: दिल्ली सरकार ने अपने सभी विभागों और एजेंसियों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है कि उन्होंने जिन ठेकेदारों की सेवा ली है, वे अस्थायी कर्मचारियों को बोनस प्रदान करें. श्रम आयुक्त द्वारा जारी परामर्श में कहा गया है कि लेखा वर्ष के दौरान किसी भी दिन 20 या उससे अधिक कर्मचारियों को रोजगार देने वाले सभी ठेकेदार इकाइयां बोनस भुगतान कानून, 1965 के अंतर्गत आता हैं. ठेके पर काम करने कर्मचारियों से मिली शिकायतों के बाद यह निर्देश दिया गया है.

8.33 प्रतिशत बो भुगताननस करने का है प्रावधान

परामर्श में कहा गया है, “अधिनियम की धारा 10 के तहत कामगारों को मूल वेतन और महंगाई भत्ते का न्यूनतम 8.33 प्रतिशत बोनस भुगतान का प्रावधान बनाया गया है. अधिनियम की धारा 19 के अनुसार लेखा वर्ष की समाप्ति के आठ महीने के बाद बोनस देय हो जाता है. हालांकि, यह परंपरागत रूप से दिवाली से पहले दिया जाता है.” इसमें कहा गया है, “बोनस का भुगतान न करने पर प्रतिष्ठान/ठेकेदार के खिलाफ अधिनियम की धारा 28 के तहत कार्रवाई की जा सकती है.”

सरकार को मिल रही हैं शिकायतें

बता दें की इसमें कहा गया है, “यह ठेकेदारों की सांविधिक जिम्मेदारी है कि वे नियोक्ता के रूप में कर्मचारियों को बोनस का पर्याप्त रूप से भुगतान करें.” दिल्ली सरकार के विभिन्न विभागों ने बड़ी संख्या में वैसे कामगार काम कर रहे हैं जिन्हें ठेकेदारों द्वारा नियुक्त किया गया है. परामर्श में कहा गया है कि ठेकेदारों के बोनस का भुगतान न करने को लेकर ‘आउटसोर्स’ कर्मचारियों से शिकायतें प्राप्त हो रही हैं.

सभी निजी प्रतिष्ठानों पर लागू होता है नियम

इसमें यह भी कहा गया है, “बोनस भुगतान अधिनियम, 1965 सभी निजी प्रतिष्ठानों और राज्य सरकारों के प्रतिष्ठानों पर भी लागू होता है. यह वैसे प्रतिष्ठानों पर लागू होता है जिसने लेखा वर्ष के दौरान किसी भी दिन 20 या अधिक श्रमिकों को रोजगार प्रदान किया है.”

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By Anshu Pandey

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