Indian Railway :- निर्माण कार्य के चलते दिल्ली समेत देश के दूसरे हिस्सों से वैष्णव धाम यात्रा पर जाने वाले यात्रियों की परेशानियां बढ़ेगी. रेलवे फिरोजपुर मंडल के बाड़ी ब्राह्मण स्टेशन पर सेटेलाइट फ्रेट टर्मिनल का विकास किया जा रहा है. इसके चलते रेलवे ब्लॉक लेगा औऱ दिल्ली समेत दूसरी जगहों से वैष्णव देवी के लिए संचालित होने वाली कई ट्रेनें प्रभावित होंगी. ट्रेन संख्या 14034 श्रीमाता वैष्णो देवी कटड़ा-दिल्ली जंक्शन मेल 7 से 13 सितंबर तक निरस्त की जाएगी. वापसी में 14033 दिल्ली जंक्शन-श्रीमाता वैष्णो देवी कटड़ा मेल 6 से 12 सितंबर तक निरस्त रहेगी.

कौन-कौन सी ट्रेन है रहेगी निरस्त?

बता दें की ट्रेन संख्या 22439 नई दिल्ली वैष्णो देवी कटड़ा एक्सप्रेस मार्ग में 45 मिनट ठहरकर ही चलेगी. ट्रेन संख्या 12471 बांद्रा टर्मिनस-वैष्णो देवी कटड़ा 11 सितंबर को मार्ग में 60 मिनट रुककर चलेगी. ट्रेन संख्या 15655 कामाख्या श्रीमाता वैष्णो देवी कटड़ा एक्सप्रेस 11 सितंबर को अपने निर्धारित समय से 180 मिनट की देरी से यात्रा करेगी. ट्रेन संख्या 12471 बांद्रा टर्मिनस-श्रीमाता वैष्णो देवी कटड़ा एक्सप्रेस 12 सितंबर को अपने निर्धारित समय से 120 मिनट की देरी से प्रस्थान करेगी. ट्रेन संख्या 12472 श्रीमाता वैष्णो देवी कटड़ा-बांद्रा टर्मिनस एक्सप्रेस 13 सितंबर को अपने निर्धारित समय से 270 मिनट की देरी से चलेगी. इसी तरह ट्रेन संख्या 12356 जम्मूतवी-पटना एक्सप्रेस 7 और 11 सितंबर को लुधियाना तक ही चलेगी.

 

बता दें की ट्रेन संख्या 12469 कानपुर-जम्मूतवी एक्सप्रेस 7 से 9 सितंबर तक, ट्रेन संख्या 12470 जम्मूतवी-कानपुर एक्सप्रेस 6 से 8 सितंबर तक, ट्रेन संख्या 14503 कालका-वैष्णो देवी कटड़ा एक्सप्रेस 6 से 9 सितंबर तक, ट्रेन संख्या 14504 श्रीमाता वैष्णों देवी कटड़ा-कालका एक्सप्रेस 7 और 10 सितंबर को निरस्त की गई है. निर्माण कार्य की वजह से ट्रेन संख्या 12207 काठगोदाम-जम्मूतवी स्पेशल 13 सितंबर को निरस्त रहेगी तो ट्रेन संख्या 12587 गोरखपुर-जम्मूतवी स्पेशल 12 सितंबर को और ट्रेन संख्या 15098 जम्मूतवी-भागलपुर एक्सप्रेस 13 सितंबर को निरस्त रहेगी.

गति शक्ति यूनिट ने शुरू किया प्रोजेक्ट

जानकारी के मुताबिक, उत्तर रेलवे की गति शक्ति यूनिट ने दिल्ली-टपरी रेलमार्ग पर रामपुर मनिहारन स्टेशन पर इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग का काम शुरू किया है. इस परियोजना के अनुसार रेलवे की सुरक्षा और क्षमता के लिए बुनियादी ढांचे विकसित किए जाएंगे. पुराने यांत्रिक इंटरलॉकिंग (केबिन संचालित लीवर फ्रेम) को पॉइंट, सिग्नल के केंद्रीकृत संचालन से बदला जाएगा. इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग के परिणामस्वरूप बेहतर संरक्षा व यार्ड संचालन किये जाने की योजना है.

By Kajal

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