लहरों से डर कर नौका पार नहीं होती, कोशिश करने वालों की हार नही होती । इस पंक्ति को सच कर दिखाया यूपी राज्य के एक युवा ने,मेहनत अगर सच्चे इरादे के साथ की जाए तो सफलता जरूर मिलती है। इस युवा सफलता की कहानी हर उस युवा के लिए प्रेरणा साबित हो सकती है, जो मुश्किल हालातों या गरीबी के आगे अपने सपनों को साकार नहीं कर पाते हैं। आज हम जिस आईपीएस अधिकारी के बारे में बताने जा रहे हैं उनका नाम किशोर कुमार रजक है।आपको बता दे की, किशोर कुमार एक ऐसे इलाके से आते हैं जो नक्सल प्रभावित क्षेत्र है। गरीबी इतनी कि उन्हें अपने बचपन के दिनों में मजदूरी करनी पड़ी। लेकिन मेहनत और लगन के इतने पक्के थे पहली ही बार में अधिकारी पद हासिल कर ली। आइए जानते हैं किशोर कुमार रजक ने कैसे सफलता हासिल कर ली।

आइए जानते है कौन हैं किशोर कुमार रजक

किशोर कुमार राजम बुड्ढीबिनोर के रहने वाले है, जो झारखंड के बोकारो जिले के एक छोटे सा गाँव हैं। उनका गाँव चंदंकर विधानसभा के अधीन था। परिवार की वित्तीय स्थिति अच्छी नहीं थी। किशोर के पिता का नाम दुर्योधन है और मां का नाम रेनुका देवी है। जब पिता एक कोयला खदान में एक मजदूर के रूप में काम करते थे, तो माँ ने घर को संभाला। परिवार में माता -पिता के अलावा, किशोर के 4 भाई -बहन हैं। किशोर घर में सबसे कम उम्र के हैं, भले ही वह कड़ी मेहनत की अग्रिम पंक्ति में हैं।

एक बड़े परिवार में रहने के कारण जो भी पिता को मिलता था, वह बच्चों के रखरखाव में खर्च हो जाता है। उन्होंने गांव के एक स्कूल में अपना प्रारंभिक अध्ययन शुरू किया। छोटी से उम्र में, तो वह अपने पिता के साथ खेतों में काम करता था और उस समय पालतू जानवरों को झुलाता और खेलता था। इस बीच, वह रात को अध्ययन भी करता था। उन्होंने कहा कि पैसे की कमी के कारण, घर पर बिजली नहीं थी, इसलिए वे रात में या रोशनी की मदद से अध्ययन करते थे। उन्होंने अपने प्रारंभिक अध्ययन को पूरा करने के बाद इग्नाउ से स्नातक की पढ़ाई की।गरीबी के कारण शुरुआती पढ़ाई में उनके नंबर ज्यादा अच्छे नहीं आए लेकिन बाद में उन्होंने अपने पढ़ाई को सुधार लिया।

साल 2007 में सेमेस्टर की पढ़ाई में वो फेल हो गए। हालांकि साल 2008 में उन्होंने स्नातक की डिग्री हासिल कर ली। किशोर कहते हैं कि बचपन में एक टीचर ने क्लास में उन्हें बताया था कि अगर मजदूरी करोगे तो मजदूर बने रहोगे। टीचर की इस सीख ने उनको बहुत प्रभावित किया। किशोर ने बचपन से ही बड़ा अधिकारी बनने का विचार कर लिया था।स्नातक की पढ़ाई पूरी करने के बाद किशोर कुमार रजक यूपीएससी की तैयारी करना चाहते थे। अपनी यूपीएससी की तैयारी के लिए दिल्ली आ गए। लेकिन उनके पास तैयारी के लिए रुपए नहीं थे।आर्थिक स्तिथि ठीक न होने की वजह से उन्होंने अपनी दीदी से कुछ रुपए मांगे। उनकी बड़ी बहन पुष्पा ने भाई की मदद के लिए गुल्लक तोड़ दिया। बहन ने बचत के करीब 4 हजार रुपए निकालकर किशोर को दिल्ली जाने के लिए दे दिए। उन रुपयों को लेकर किशोर दिल्ली पहुंचे और यूपीएससी की तैयारियों में जुट गए।

पीसीएम परीक्षा में टॉपर बने किशोर

किशोर कुमार को जब लगा कि उनके लिए यूपीएससी परीक्षा नहीं बनी है। तो उन्होंने दिल्ली से झारखंड वापस आने का फैसला किया। झारखंड के एक कोचिंग संस्थान में वो बच्चों को पढ़ाने लगे। इसके अलावा वो स्टेट पीसीएस परीक्षा की तैयारी में भी जुट गए। साल 2016 में उन्होंने स्टेट पीसीएस की परीक्षा में टॉप किया। इसी के साथ वो झारखंड पुलिस में डीएसपी में अधिकारी के पद पर तैनात हो गए।

आपकी जानकारी के लिए आपको बता दे की ,अभी वो झारखंड पुलिस के स्पेशल इंडियन रिजर्व बटालियन (SIRB) में कार्यरत हैं। उनकी इस सफलता के बाद परिवार को अपने बेटे पर बहुत गर्व है। उनके पिता कहते हैं कि जिन मुश्किल हालातों का सामना कर मेरे बेटे ने सफलता हासिल की है, वो युवाओं के लिए एक नजीर है। साल 2017 में कोचिंग में पढ़ने वाली एक वर्षा नाम की एक लड़की के साथ शादी कर ली। वर्षा पेशे से एक वकील हैं। किशोर सोशल मीडिया में भी काफी छाए रहते हैं। ट्वीटर पर उनके 20 हजार से भी ज्यादा फॉलोवर्स हैं। सोशल मीडिया के माध्यम से अकसर वो युवाओं को प्रेरणादायक कहानियां शेयर करते रहते हैं।

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  • Abhishek Raj Is Journalist & Edtior Of Expresskhabar.in , Abhishek Raj writing news, views, reviews and interviews with expresskhabar.in.

By Abhishek Raj

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