19 साल बाद दिल्ली के मेट्रो पर बड़ा बदलाव हो रहा है बता दें दिल्ली मेट्रो जल्द ही स्वदेशी सिग्नल प्रणाली से चलेगी। डीएमआरसी के प्रबंधक निदेशक मंगू सिंह ने बृहस्पतिवार को रेड लाइन पर इस प्रणाली के अंतिम परीक्षण का उद्घाटन किया। इससे कहा जा सकता है कि जल्द ही रेड लाइन पर इस प्रणाली से मेट्रो का परिचालन किया जाएगा।

पिछले साल शुरू किया गया था स्वेदशी सिग्नल प्रणाली का परीक्षण

पिछले साल 24 दिसंबर को दिल्ली मेट्रो के परिचालन 19 साल पूरे होने पर दिल्ली मेट्रो पर स्वदेशी सिग्नल प्रणाली आइ-एटीएस (स्वदेशी – आटोमेटिक ट्रेन सुपरविजन) का परीक्षण शुरू किया गया था। यह परीक्षण दिल्ली के सबसे पुराने कारिडोर रेड लाइन यानी की रिठाला-गाजियाबाद न्यू बस अड्डा पर किया गया था। अभी तक मेट्रो के परिचालन में विदेशी सिग्नल प्रणाली का इस्तेमाल हो रहा है।

सिग्नल प्रणाली के साफ्टवेयर पर दिल्ली मेट्रो सहित देश के अन्य मेट्रो नेटवर्क का भारी भरकम राशि खर्च होता है। इसे देखते हुए केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय के निर्देश पर डीएमआरसी ने बीईएल के साथ मिलकर सीबीटीसी के विकास का कार्य शुरू किया है।

अन्य शहरों के मेट्रो में भी हो सकेगा इस्तमाल

डीएमआरसी का कहना है कि स्वदेशी सिग्नल प्रणाली के इस्तमाल दिल्ली मेट्रो के अलावा अन्य शहरों के मेट्रो और रेलवे में भी हो सकेगा। ट्रेन कंट्रोल सिंगनल प्रणाली को विकसित करने की दिशा में यह एक बड़ा कदम है जो डीएमआरसी द्वारा उठाया गया है।

इसकी मदद से सिर्फ डेढ़ मिनट के अंतर पर मेट्रो का परिचालन हो सकता है। वर्तमान समय में ट्रेन की सूचना के लिए मजेंटा व पिंक लाइन सिस्टम का इस्तेमाल किया गया है। यह सिस्टमविदेशी कंपनी की मदद से चल रही है। इस तकनीक के लिए डीएमआरसी यूरोप के देशों और जापान से मदद ले रही है। फेज चार के कारिडोर पर डीएमआरसी स्वदेशी संचार आधारित ट्रेन कंट्रोल सिग्नल प्रणाली का इस्तेमाल करेगा।

 

 

 

 

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  • Abhishek Raj Is Journalist & Edtior Of Expresskhabar.in , Abhishek Raj writing news, views, reviews and interviews with expresskhabar.in.

By Abhishek Raj

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