ईशान किशन भारतीय क्रिकेट टीम के शानदार खिलाड़ी है। ईशान किशन ने इस बात को साबित करने के लिए दोहरा शतक लगाया आपको अंदाजा तो लग गया होगा ईशान किशन के बल्ले से विश्व का सबसे तेज दोहरा शतक।

कब जन्म हुआ ईशान किशन का और कहां पर

Ishan Kishan Faimly

ईशान किशन का जन्म 18 जुलाई 1998 को बिहार के नवादा जिले में एक मध्यवर्गीय परिवार में हुआ था। ईशान किशन के पिताजी का नाम प्रणव पांडे है जो की पहले एक बिल्डर का काम करते थे और उनके माता जी का नाम सुचित्रा सिंह जो एक हाउसवाइफ थी। ईशान किशन के एक बड़े भाई भी है जिसका नाम राजकिशन है।

ईशान किशन के भाई भी खेलते थे क्रिकेट

ईशान किशन दोनों भाई बचपन से ही क्रिकेट खेलने में रुचि रखते थे। उनके बड़े भाई राजकिशन स्टेट लेवल के क्रिकेटर रह चुके हैं। ईशान किशन अपने दादी के सबसे बड़े लाडले पोते थे। बचपन के समय में ईशान किशन अपने शरारतों की वजह से जायदा पीटते थे।

जब ईशान किशन का जन्म हुआ उसके बाद उनके पिता पटना मे शिफ्ट हो गए थे। एक बार ईशान किशन का बड़ा भाई राजकिशन अंडर 14 क्रिकेट मैच में भाग लिया जिसमें ईशान किशन ने भी क्रिकेट में जाने के लिए अपने पिता से जिद करने लगे। तो उनके पिताजी ने सोचा कि ऐसे भी तो इन दोनों का सिलेक्शन नहीं होने वाला है और इसलिए उनके पिताजी ने ईशान किशन को क्रिकेट में भाग लेने की छूट दे दी। हालाकि ईशान के बड़े भाई का क्रिकेट में सिलेक्शन हो ही गया।

सेलेक्टर्स की निगाहों में थे ईशान किशन

ग्राउंड पर वहां ईशान किशन को खेलते देखकर वहां के कोच काफी उनसे प्रभावित हुए और ईशान किशन को भी सिलेक्ट कर लिया। और कहा कि जब बच्चा इतनी कम उम्र में इतना अच्छा क्रिकेट खेल रहा है तो आगे चलकर इससे भी अच्छा खेल सकता है। इशान किशन और बड़ा भाई दोनो क्रिकेट खेलने में बहुत अच्छा थे।

जब पिता के कहने पर क्रिकेट छोड़ा ईशान किशन के बड़े भाई ने

ईशान के पिताजी ने कहा कि क्रिकेट में बहुत रिस्क का खेल है क्या पता सक्सेस हो या ना हो , पता नही कभी खेलने का मौका मिलेगा या नहीं, इसीलिए दोनो में से कोई एक पढ़ाई करो। ईशान का बड़ा भाई पढ़ाई में भी अच्छा था इसीलिए उन्होंने अपने क्रिकेट कैरियर के साथ सैक्रिफाइस किया और आज डॉक्टर है।ईशान किशन के कोच संतोष कुमार ने उनके पिता को झारखंड से खेलने की सलाह दी।

क्योंकि उस समय BCCI ने बिहार क्रिकेट एसोसिएशन की मान्यता किसी कारण वश से रद्द कर दिया था। और ईशान किशन के पिता भी चाहते थे कि हमारा बेटा आगे चलकर एक भारतीय क्रिकेटर बने इसलिए उन्होंने ईशान को झारखंड के रांची भेज दिया।

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